यह एक बड़ा ही जटिल प्रष्न है । मनुश्य के पास दो दृश्टि होती है । प्रथम भौतिक दृश्टि जिससे वह संसार की वस्तुओं को देखता है । दूसरी दृश्टि दिव्य दृश्टि होती है । जिसे वह कठोर साधना से प्राप्त करता है । इस संदर्भ में हम अर्जुन के साथ सारथी संजय का नाम भी ले सकते है । महाभारत के समय मित्र मानव रूप में भगवान श्रीकृश्ण सदैव अर्जुन के साथ रहते थे , किन्तु उनके विराट रूप देखने के लिए जब उन्होने अर्जुन को ‘दिव्य -दृश्टि ’ प्रदान की तब वे भगवान श्रीकृश्ण के विराट रूप को देेख सके । जो देवताओं के रूप को देखने के अधिकारी होते है उन्हें ही देवता दिखायी देते है अन्य को नहीं ।
PRAVEEN CHOPRA