कल्पवृक्ष क्या है?
‘कल्पवृक्ष’ अर्थात् समस्त अभिलाशा पूरी करने वाला वृक्ष । कहा जाता है कि इन वृक्षों के नीचे षुद्ध मन से अगर कोई भी व्यक्ति मनोकमना करता है ,तो वह निःसदेह पूरी होती है । इन वृक्षों के यह होने के विशय में भी अनेक किंवदतियां प्रचलित है । आज से हजारों वर्श पूर्व एक तपस्वी अपने तपोबल से इन वृक्षों को उड़ाकर ले जा रहा था । रात्रि के समय वह अपने तपाबल से पष्चिम की ओर अग्रसर हुआ । एक ग्राम के पास से उड़ते -उड़ते इन्हें प्रातः हो गयी और ग्राम में महिलाओं द्वारा अनाज पीसने की चक्की की आवाज तपस्वी को सुनाई पडी , जिससे उसका बल निर्बल हो गया और ये वृक्ष वही रह गए । कल्पवृक्ष की उत्पत्ति के विशय में एक किवंदंती और प्रचलित है । युगों पुरानी बात है कि एक बार देवता असुरों से हार कर बहुत दुःखी हुए । उन्हें असुरों से जीतने का कोई मार्ग न दिखा , तो सब मिलकर ब्रह्मा के पास गए । उस समय वे सुमेरू पर्वत पर सभा कर रहे थे । देवताओ ने असुरों से जीतने का मार्ग पूछा । उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन से अमृत निकलेगा , उसे पीने पर देवता अवर हो जाएंगे और असुरों को जीत लेंगे । समुद्र मंथन करने पर उनको अनेक रत्न मिले , उनमें से एक कल्पवृक्ष भी था । कलियुग में श्रद्धालु कल्पवृक्ष के दर्षन कर अपना सौभाग्य समझते है । कल्पवृक्ष में पत्ते व फूल आते है तथा इसका फल बड़ा ही चमत्कारी है ।नारी वृक्ष में हर बारह वर्श के पष्चात बैंगनी रंग का एक फल लगता है , जो आकार में नारियल के समान होता है ,लेकिन फूल अदृष्य रहता है । जिसका भाग्य है ,उसे ही यह फल प्राप्त होता है ,जिससे उस व्यक्ति का परिवार समृद्ध हो जाता है । राजा वृक्ष की गोलाई पूरी एक पगड़ी के बराबर है और यही इसका परिधान है । रानी वृक्ष पर महिलाओं द्वारा कांचली चढ़ाई जाती है । काजल तथा मेहंदी कुंवारी कन्या के विवाह की होती है ,इसी के साथ हरियाली अमावस्या का उपवास किया जाता है । मनोकामना पूरी होने पर विवाहिता अपने पति अथवा माता के साथ यहां आकर रानी वृक्ष को पूरी महिला वस्त्र चढा़ती है । आस्था स्वरूप थोड़ी - सी छाल को वह कन्या तभी वह लाती है ,जब उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है पुत्री का विवाह होने ,संतान होने अथवा बिगड़े सम्बंध पुनः मधुर होने पर माता -पिता कल्पवृक्ष पूजन के लिए आते है ।
कल्पवृक्ष के आस पास हर समय कोई -ना -कोई रहता है । यू ंतो पूरी सृश्टि किसी प्राकृतिक चमत्कार से कम नहीं है । कई ऐसी घटनाएं भी हुई है जिनके विशय में हम केवल सुनते आए है या केवल कल्पना ही करते है ,लेकिन जब वे सच्चाई से सामने आ जाती है ,तो सचमुच आष्चर्य होता है ।
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