गणतंत्र दिवस 2026: लोकतंत्र, संविधान और पत्रकारिता की साझा जिम्मेदारी
26 जनवरी 2026 का दिन भारतीय गणराज्य के लिए एक बार फिर आत्ममंथन और आत्मगौरव का अवसर लेकर आया है। आज से 76 वर्ष पूर्व इसी दिन भारत ने अपने संविधान को पूर्ण रूप से लागू कर स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था। यह दिन केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस की चेतना, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है।
भारतीय संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की आशाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का जीवंत दस्तावेज़ है। इसमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व के जिन मूल्यों को स्थापित किया गया, वे आज भी हमारे लोकतंत्र की रीढ़ बने हुए हैं। 2026 में खड़े होकर जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि भारत ने अनेक चुनौतियों—राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक—का सामना करते हुए अपने लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाए रखा है।
इस यात्रा में पत्रकारिता की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। भारतीय जर्नलिस्ट परिषद का मानना है कि एक सशक्त लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार मीडिया अनिवार्य है। पत्रकार केवल सूचनाओं के वाहक नहीं होते, बल्कि वे सत्ता और समाज के बीच सेतु का कार्य करते हैं। संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पत्रकारों को यह नैतिक दायित्व सौंपती है कि वे सत्य को निर्भीकता से सामने लाएँ, चाहे परिस्थितियाँ कितनी ही चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।
आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के युग में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हैं—फेक न्यूज़, सूचना का अतिरेक, और विश्वास का संकट ऐसे समय में गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित, सत्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा है, न कि सनसनी या दबावों के आगे झुकना। भारतीय जर्नलिस्ट परिषद निरंतर इस बात पर बल देती रही है कि मीडिया को आत्मसंयम, तथ्यपरकता और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
गणतंत्र दिवस 2026 पर जब देश कर्तव्य पथ पर परेड के माध्यम से अपनी सैन्य, सांस्कृतिक और सामाजिक शक्ति का प्रदर्शन करता है, तब यह भी आवश्यक है कि हम अपने कर्तव्यों पर उतना ही ध्यान दें जितना अपने अधिकारों पर। एक जागरूक नागरिक, एक जिम्मेदार पत्रकार और एक संवेदनशील समाज—यही एक मजबूत गणराज्य की पहचान है।
भारतीय जर्नलिस्ट परिषद इस अवसर पर सभी नागरिकों, विशेषकर मीडिया जगत से जुड़े साथियों से आह्वान करती है कि वे संविधान की भावना को आत्मसात करें, लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करें और राष्ट्रहित में सत्यनिष्ठ पत्रकारिता को अपना मूल मंत्र बनाए रखें। यही 26 जनवरी की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
PRAVEEN CHOPRA